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बाल क्षय रोगियों को मिला निक्षय मित्र का सहयोग

· खबरी पोस्ट नेशनल न्यूज नेटवर्क

चंदौली। देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए हरस्तर पर प्रयास हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ही नहीं बल्कि स्वयंसेवी संस्थाएं भी इसमें बढ़चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। क्षय रोगियों के लिए काम कर रही ऐसी ही सामाजिक संस्था ‘स्वामी कबीर मेमोरियल ट्रस्ट’ ने 28 बाल क्षय रोगियों को गोद लिया है। इनमें 24 बच्चे अब पूरी तरह ठीक हो चुके हैं, चार का उपचार चल रहा है।

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम से प्रेरित होकर ‘कबीर मेमोरियल ट्रस्ट’ ने भी उठाया बीडा

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम से प्रेरित होकर ‘कबीर मेमोरियल ट्रस्ट’ ने टीबी रोगियों की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग से सम्पर्क किया और पांच सितंबर 2021 को क्षय रोग से पीड़ित ऐसे बच्चों को गोद लिया जो आर्थिक रूप से कमजोर थे। इनमें सूरज गुप्ता, प्रशांत, आकाश, बादशाह, फातिमा बेगम, जया कुमार , शबनम बानो समेत 28 क्षय रोगी शामिल रहे। संस्था उन्हें नियमित पोषण पोटली वितरित की और समय से दवाएँ लेने के लिए प्रेरित किया जिसका नतीजा रहा कि उनमें 24 अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं।

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‘कबीर मेमोरियल ट्रस्ट’ की कहानी देखिए ठीक हो चुके क्षय रोगियो की जुबानी

संस्था के प्रयासों से ठीक होने वालों में नियमताबाद की राधा (16 वर्ष ) बताती हैं – घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है।पिता मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं। मई 2022 में हमें टीबी होने का पता चला। सरकारी अस्पताल में दवा व जांच की सुविधा मिल रही थी लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण पोषक आहार खुद खरीदना हमारे परिवार के लिए संभव नहीं था। ऐसे में पता चला कि स्वामी कबीर मेमोरियल संस्था के लोगों ने मुझे गोद लिया है। इस संस्था के सहयोग से हर महीने पौष्टिक आहार की सुविधा उपलब्ध करायी गयी। इससे आर्थिक बोझ परिवार पर नहीं पड़ा और छह माह में मैं पूरी तरह स्वस्थ हो गयी।

क्षय रोग से पीड़ित ऐसे बच्चों को गोद लेते हैं जिनके अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती– संस्थापक दिलीप कुमार

स्वामी कबीर मेमोरियल ट्रस्ट के संस्थापक दिलीप कुमार बताते हैं – हम क्षय रोग से पीड़ित ऐसे बच्चों को गोद लेते हैं जिनके अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती। हम उनके घर जाकर हर महीने दाल, अनाज, सोयाबीन दूध जैसे पोषक आहार उपलब्ध कराते हैं। क्षय रोगियों को जो पोषण पोटली उपलब्ध कराते हैं उसमें एक किलो चना, एक किलो गुड, एक किलो सत्तू, एक किलो गजक, एक किलो पूरक पौष्टिक सामग्री शामिल रहता है। नियमित दवा के साथ पोषक आहार लेने से मरीजों की सेहत में तेजी से सुधार होता है। इस दौरान हम उनके स्वास्थ्य के बारे में विधिवत जानकारी लेते रहते हैं। जरूरत पड़ने पर मरीज को लेकर उसके घर के नजदीक स्वास्थ्य केंद्र पर भी ले जाते हैं। जांच और दवा उपलब्ध कराने में सहयोग करते हैं।

टीबी उन्मूलन के लिए जनभागीदारी अनिवार्य‚टीबी मरीज जल्द से जल्द ठीक हों यह हम सभी के लिए एक चुनौती

जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिले में कुल 29 निक्षय मित्रों के सहयोग से वर्ष 2022 में 2222 मरीजों और वर्ष 2023 में अब तक में 196 मरीजों को गोद दिया गया है।
उन्होंने कहा- टीबी उन्मूलन के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है। समाज में टीबी को लेकर कई भ्रांतियां हैं, जिसे जन जागरूकता के माध्यम से खत्म किया जा सकता है। जिले के 80 प्रतिशत टीबी मरीज ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं। गांव में रहने वाले लोग ज्यादातर मजदूरी करते हैं। इलाज के दौरान उन्हें पौष्टिक आहार मिले यह हम सभी को सुनिश्चित करना है। टीबी मरीज जल्द से जल्द ठीक हों यह हम सभी के लिए एक चुनौती है। मरीज जल्दी ठीक होंगे तो संक्रमण के फैलने का खतरा कम रहेगा। इसके लिए अधिक से अधिक निक्षय मित्रों को सहयोग के लिए आगे आना होगा।