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डॉ. सत्या हॉप टॉक ने 81 से अधिक नारी शक्ति को दिया चर्चा का मौका कई बातें खुल कर आईं सामने

खबरी पोस्ट नेशनल न्यूज नेटवर्क

वाराणसी। भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रेरणा से शिक्षा और साहित्य के माध्यम से जन जागरण को संचालित कर रहा कार्यक्रम डॉ. सत्या हॉप टॉक पिछले 10 दिसंबर 2023 से अनवरत एक नवीन कार्यक्रम श्रृंखला वह पांच प्रश्न और मेरी कहानी को लेकर चल रहा है। समाज में लिंग भेद एक बड़ी बुराई है, जिससे लड़ने के लिए सरकारी और सामाजिक प्रतिष्ठान अनवरत कार्यरत हैं। महिला उत्थान के लिए वचनबद्ध सरकारों ने पूर्व में ऐसे अनेकों कदम उठाएं हैं, जिसे वर्तमान युग में महिला की आवाज और उसके विश्वास को मजबूती मिली है।

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विश्व के कोने-कोने से जुड़ी हुई अनेकों महिलाओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को किया साझा

समाज में स्त्री पुरुष भेद की मानसिकता को हतोत्साहित करने के लिए चर्चा के माध्यम से सच्ची कहानियों को कार्यक्रम का भाग बनाया गया है, जिसमें विश्व के कोने-कोने से जुड़ी हुई अनेकों महिलाओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा किया है। परिवार में पालन पोषण के स्तर से लेकर, पढ़ाई लिखाई के लिए सामाजिक और पारिवारिक परिदृश्य पर विचार विमर्श ने यह संकेत भी दिया है कि अभिभावकों के बीच में लड़के और लड़की में भेद करना एक रूढ़िवादी मानसिकता रही है, जिसका प्रभाव अनेकों पीढ़ियों तक रहा है। भ्रूण हत्या और दहेज प्रथा एक बड़ा सामाजिक रोग लिंग भेद के कारण ही उपजा है, जिसके लिए सरकारी स्तर पर कानून होने के बावजूद बड़ी जन जागरूकता की आवश्यकता देखी जा रही है। अमेरिका में बैठी नारी शक्ति ने भी वहां के वातावरण में प्रवासी भारतीयों की महिलाओं के साथ हो रही एकाकी जीवन की पीड़ा और अपनी संस्कृति के साथ कटते हुए बच्चों पर दुष्प्रभाव को इंगित किया है। भारत की कुछ महिलाओं ने स्त्री पुरुष भेद की मानसिकता को परिवारों की टूटने वाली ग्रंथि भी बताया है और जिसका शिकार हुई महिलाओं ने अपनी बात को पुरजोर तरीके से रखा है। इस कार्यक्रम में अनेकों महिला शक्ति ने समाज में आ रहे बड़े परिवर्तन और बिना भेद भाव के मिल रहे माहौल की भी अनुभूति को साझा किया जिससे भावी समाज के लिए नई उम्मीद दिखाई देना शुरू हुई है। अनेकों लोगों ने इस विशेष कार्यक्रम को अपना विशिष्ट कार्यक्रम माना है और उनको समाज की समस्याओ को जानने समझने के लिए आसनी भी हो रही है।

स्वरोजगार अथवा आर्थिक उन्नयन महिलाओं के लिए अति आवश्यक

पूरे भारत को जानने के लिए डॉ. सत्या हॉप टॉक कार्यक्रम माध्यम बन कर उभरा है। यह माना गया है कि स्वरोजगार अथवा आर्थिक उन्नयन महिलाओं के लिए अति आवश्यक चरण है, जिसके बिना समाज में और परिवार में महिला को समुचित स्थान नहीं मिल पा रहा।

विशिष्ट व्यक्तित्वों ने यह माना कि सशक्त नारी सभ्य समाज का आधार

81 महिलाओं से अधिक व्यक्तित्व से चर्चा करने के उपरांत भी यह कार्यक्रम अभी भी संचालित है और डॉ. सत्य प्रकाश जो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एक वैज्ञानिक हैं, उनकी कोशिश है कि उनके अनुज्ञा सत्य नारी शक्ति कार्यक्रम के माध्यम से अधिक से अधिक नारी शक्ति को एक नई पहचान दी जा सके। विश्व महिला दिवस 8 मार्च के आलोक में इस मंच के द्वारा विशिष्ट सत्य-नारी-शक्ति अनुज्ञा सम्मान 501 महिलाओं को प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संदेश बहुत ही श्रेष्ठ रहा जिसका अनुसरण वर्तमान सरकार भी करती दिखाई दे रही है। मंच से जुड़े 200 से अधिक विशिष्ट व्यक्तित्वों ने यह माना कि सशक्त नारी सभ्य समाज का आधार होती है।

अनुज्ञा कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय अध्यक्षा डॉ. इंदिरा गुप्ता यथार्थ जो राजस्थान से जुड़ी हैं, उन्होंने कार्यक्रम में और ऊर्जा लगाने की बात कही और माता-पिता की परवरिश को इन सभी सामाजिक मूल्यों के लिए महत्वपूर्ण माना।

22 मार्च से प्रारम्भ हो रहे होलिकोत्सव कार्यक्रम में 555 जीवन को रचने वाले नवीन सृजन की परिकल्पना

सत्या हॉप टॉक के राष्ट्रीय प्रवक्ता बिजनौर से जुड़े नीरज कांत सोती जी ने पूरी MEET टीम को एक समान मानते हुए 22 मार्च से प्रारम्भ हो रहे होलिकोत्सव कार्यक्रम में 555 जीवन को रचने वाले नवीन सृजन की परिकल्पना रखी, जिसे सभी साथियों ने सहर्ष स्वीकार किया है। ज्ञात हो कि कवि के साथ कॉफी कार्यक्रम, पिछले पांच वर्षों से समान विचार धारा से जुड़े लोगों के साथ समाज में बड़े वैचारिक परिवर्तन के लिए सतत कार्य कर रहा है और अब इसका प्रभाव नए और अनुभवी लोगों को बड़े पैमाने पर समझ भी आ रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर दिए गए नवीन अंवेषी सम्मान के लिए अनेकों साथियों ने डॉ. सत्य प्रकाश जी के नाम की अपेक्षा भी की थी परन्तु स्वयं के कर्म को अपने जीवनचर्या में महत्वपूर्ण मानने वाले वैज्ञानिक को इसकी कोई आवश्यकता नहीं समझ में आती। उनका कथन यही रहता है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक इस भावना का निर्माण कि ‘हम मिल कर कुछ अच्छा कर सकते हैं’, बस इतनी उम्मीद की स्थापना हो जाना ही मेरे लिए किसी भी राष्ट्रीय अलंकरण से कम नहीं है।

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