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सलील पांडेय

खबरी पोस्ट नेशनल न्यूज नेटवर्क

◆स्वतन्त्रता पूर्व से लेकर अबतक की पांचवी पीढ़ी पप्पू, साहबज़ादा, बाल-बुद्धि लगता है तो शाही शादी के उछलकूद, नाच-गाने-झूमने के माहौल में आरती उतारते समय साहबज़ादा और पप्पू का ख़िताब देने का मन हुआ या साक्षात भगवान का दर्शन होने लगा?
◆यह सशक्त हस्ताक्षर एवं मोहर के साथ जारी हो जाए तो लोगों को तदनुरूप सम्बोधन करने में सुविधा होगी।
◆मिर्जापुर के युवा सामाजिक कार्यकर्ता एवं सामाजिक विसंगतियों की विषक्तता को दूर करने के लिए मदद का चंदन लेप करने में अग्रणी चन्दन यादव के सचित्र पोस्ट से पता चला कि शाही खानदान में फ़िलहाल देवी बन कर प्रकट हुई साहबजादी के लहंगे में घुटने के नीचे पैर की एड़ी तक लहराते लहंगे में राधा-कृष्ण का चित्र उकेरा गया था।
◆यह परिदृश्य सनातन संस्कृति के उत्थान और राष्ट्रभक्ति की निशानी है या यह गद्दार और पाकिस्तानपरस्त सेकुलरों का षडयंत्र?
◆फ़िलहाल पीड़ा भरे शब्दों और परिस्थितियों की जब अनदेखी होती है तो उसे कोई अदृश्य शक्ति देखती है। फिर अन्यायी और पॉवर के चलते हेठी पर कहर बन कर टूट पड़ता है। जबर्दस्त तमाचा लगाता हैं।
◆यह तमाचा अयोध्या से लेकर बद्रीनाथ ही नहीं यत्र-तत्र दिख भी रहा है।

◆अनर्गल प्रलापों की ताप में झुलसना सबको पड़ता है। चाहे हम (लिखने वाला) हों, आप (पढ़ने वाला) या ‘वो’ हों जिनके उकसावे पर अलाप-विलाप का माहौल बनाया जाता है।

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