इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि मुकदमा दर्ज होने पर भी आरोपी विदेश जा सकेगा. हाईकोर्ट ने इस संबंध में अदालतों को विदेश जाने की अनुमति की अर्जी निस्तारण का अधिकार दे दिया है.

खबरी पोस्ट नेशनल न्यूज नेटवर्क

प्रयागराज।आपराधिक केस के कारण लंबित पासपोर्ट के मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पासपोर्ट प्राधिकारी को आदेश दिया है कि जिन आवेदकों के खिलाफ एनसीआर दर्ज हैं, अविलंब उनके पासपोर्ट जारी या नवीनीकृत किए जाएं। कहा है कि इन लोगों को संबंधित अदालत से विदेश जाने की अनुमति नहीं लेनी होगी।

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एफआईआर की विवेचना या ट्रायल में कोर्ट की लेनी होगी अनुमति

यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह तथा न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने पवन कुमार राजभर व अन्य सहित दर्जनों याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जिन आवेदकों के खिलाफ एफआईआर की विवेचना या ट्रायल जारी है, रीजनल पासपोर्ट आफिस से पुलिस रिपोर्ट की सूचना मिलते ही उन्हें संबंधित अदालत से अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के एक हफ्ते के भीतर उनका पासपोर्ट जारी या नवीनीकृत कर दिया जाएगा।

सभी न्यायिक अधिकारी विदेश जाने की अनुमति के आवेदनों को अधिकतम चार हफ्ते में करें तय – हाईकोर्ट

कोर्ट ने सभी आवेदकों, जिनकी अर्जी विचाराधीन है। दो माह का समय दिया है कि वे दो हफ्ते में संबंधित अदालत से अनुमति लेकर रीजनल पासपोर्ट आफिस को दे दें ताकि यथाशीघ्र उनका पासपोर्ट जारी या नवीनीकृत किया जा सके। सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विदेश जाने की अनुमति के आवेदनों को अधिकतम चार हफ्ते में तय करें। अतिआवश्यक होने पर यथाशीघ्र तय करें।

हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण अर्जी तय करने में देरी को लेकर मांगी स्टेटस रिपोर्ट

याचिका पर अधिवक्ता चंद्रकांत त्रिपाठी सहित कई अधिवक्ताओं ने बहस की। भारत सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजीआई) शशि प्रकाश सिंह व प्रदेश सरकार की तरफ से शासकीय अधिवक्ता एके संड ने कोर्ट को सहयोग किया। कोर्ट ने पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण अर्जी तय करने में देरी को लेकर दाखिल याचिकाओं पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, जो उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।कोर्ट ने कहा पासपोर्ट प्राधिकारी न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करें तो समयबद्ध तरीके से अर्जियां निस्तारित की जा सकती है। ऐसा न करने के कारण हाईकोर्ट में भारी संख्या में याचिकाएं आ रही है। निर्देशों के बावजूद समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा। ई-गवर्नेंस नीति के तहत यदि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, कार्यकुशलता से ऐसी अर्जियां समय से तय की जा सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा अदालत को शर्तें तय करने का अधिकार

कोर्ट ने कहा है कि जिस अदालत के अधिकार क्षेत्र में विवेचना या ट्रायल चल रहा है, उसी अदालत को अभियुक्त की विदेश जाने की अनुमति की अर्जी तय करने का अधिकार है। अदालत को शर्तें तय करने का भी अधिकार है। एएसजीआई ने स्वयं ही आश्वस्त किया कि रीजनल पासपोर्ट अधिकारी एनसीआर केस दर्ज होने पर पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण की अर्जी को नहीं रोकेंगे और यथाशीघ्र आदेश जारी कर दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि जहां ट्रायल शुरू होने से पहले आपराधिक केस की विवेचना या जांच जारी है, अदालत को अनुमति देने या न देने का विवेकाधिकार है। वह देखेगा कि अभियुक्त विवेचना में सहयोग कर रहा है या नहीं।

ऑनलाइन रिपोर्ट भेजने का खुला हो विकल्प

पुलिस सत्यापन रिपोर्ट को लेकर कोर्ट ने कहा है कि पुलिस रिपोर्ट आनलाइन भेजने का भी विकल्प दिया जाए। तय फार्मेट पर पुलिस एनसीआर या एफआईआर का संक्षिप्त ब्योरा भी दे। पुलिस रिपोर्ट मिलते हैं रीजनल पासपोर्ट अधिकारी सूचना वेब पोर्टल पर अपलोड करें। साथ ही आवेदक को मोबाइल फोन पर मैसेज भेजने की सुविधा दी जाए। यह भी बताया जाए कि आवेदक अदालत से विदेश जाने की अनुमति प्राप्त कर सूचित करें। इस संबंध में केंद्र सरकार को भी निर्देशित किया है।

हाईकोर्ट ने रीजनल पासर्पोट आफिस को भी किया निर्देशित

कोर्ट ने रीजनल पासपोर्ट ऑफिस को निर्देशित किया कि पुलिस रिपोर्ट की सूचना प्राप्त होने के एक हफ्ते में आवेदक को सूचित करें ताकि अगले आठ हफ्ते में वह अदालत से अनुमति प्राप्त कर सके। अदालत की अनुमति की सूचना मिलने के एक हफ्ते में पासपोर्ट जारी या नवीनीकृत किया जाय।

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