अवधेश द्विवेदी

खबरी पोस्ट नेशनल न्यूज नेटवर्क

चकिया ‚चंदौली। शुक्रवार को आदित्य नारायण पुस्तकालय जिसे बार एसोसिएशन चकिया के अधिवक्ताओं द्वारा ही संचालित किया जाता है जिसका वार्षिक चुनाव 2023 काफी जद्दोजहद के बीच सम्पन्न हुआ। जिसमें अध्यक्ष पद के लिए रामकरन एड को 20 मतो से विजई घोषित किया गया । वही महामंत्री पद के लिए अखिलेश कुमार श्रीवास्तव को 34 मतो से विजई घोषित किया गया ।

आदित्य पुस्तकालय के अध्यक्ष पद के लिए रामकरन को मिला 108 मत वही ओंकारनाथ मौर्या को 88 मत तथा विकाश पांडेय को ११ मतो से संतोष करना पडा। दूसरी तरफ महामंत्री पद के लिए अखिलेश कुमार श्रीवास्तव को 119 मत व रामबाबू को 85 मत मिले। बता दे कि इसके पूर्व भी पराजित अध्यक्ष महामंत्री एक बार लाईब्रेरी के पदाधिकारी रह चुके है। जिससे अधिवक्ताओं में यह बाते चल रही थी कि हर बार ये ही दूसरा क्यो नहीǃ वही उपाध्यक्ष जितेन्द्र ‚कोषाध्यक्ष शिवमूरत ‚आडिर करमवीर ‚उपमंत्री विनय कुमार सिंह एड० के साथ कार्यकारिणी सदस्य के रूप में संतोष कुमार श्रीवास्तव‚विनोद कुमार श्रीवास्तव‚रणजीत सिंह‚लालचन्द सिंह‚मारूतीनन्दन आनन्द‚तेजवन्त नारायण‚बाबूलाल ‚बृजेश कुमार सिह के साथ ही अनन्त नारायण पाठक को निर्विरोध निर्वाचित किया गया।

आदित्य पुस्तकालय के 208 अधिवक्ताओं ने किया अपने मताधिकार का प्रयोग

आदित्य पुस्तकालय के चुनाव अधिकारी महेन्द्र सिंह एड व विजय कुमार यादव ने बताया कि अध्यक्ष पद के लिए कुल 208 मत पडे थे जिसमें 1 मत निरस्त कर दिया गया था जिसमें रामकरन को 108 मत ‚ ओंकारनाथ सिंह को 88 व विकाश कुमार पांडेय को 11 मत मिले। जिसके कारण 20 मतो से रामकरन को विजई घोषित किया गया ।

वही महामंत्री पद के लिए अखिलेश कुमार श्रीवास्तव को 119 मत ‚रामबाबू को 85 मत प्राप्त हुए जिसके कारण अखिलेश कुमार श्रीवास्तव ने 34 मतो से विजय श्री का वरण किया। सब मिलाकर 230 मतदाता थे जिसमें से 208 अधिवक्ताओं ने अपने –अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। वही बता दे कि अधिवक्ता काफी पसोपेस में रहे कि किसे चुना जाय आखिर उन्होने अपने हिसाब से सही निर्णय ले ही लिया।

लोगो के हर्ष का ठिकाना नही रहा। विदित हो कि पिछली बार रामकरन चुनाव हार रहे थे। लेकिन इस बार उनकी जीत आनन्ददाई रही। दूसरी तरफ लोगो को कानाफूसी करते सुना गया कि सत्य की जीत हुई और झूठ हार गया। जिससे उनका मतलब था कि पिछले बार ओंकार नाथ सिंह ने अपने कार्यकाल का हिसाब दूसरे कार्यकाल में आज तक नही दिया । और कुछ अधिवक्ताओं व आम जन के बीच यह भी बाते चर्चा में रही कि अच्छा हुआ नही तो लाइब्रेरी का ऊपर वाला ही मालिक होता।

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