पंडित मोती लाल नेहरू, पंडित जवाहर लाल नेहरू, पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे लेाग भी रह चुके है सदस्य

In the year 1873 the Barristers decided to have an association and on February 3, 1873 they formed an
association, called the Bar Association, with 12 European Barristers as its first members, and Mr. Jardine
became its first President. The object of the Association was to consider matters connected with the
interests of the Bar in the Province and especially to promote a high professional tone in all the branches of legal profession and to repress unprofessional practices.

खबरी पोस्ट नेशनल न्यूज नेटवर्क

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 1869 में आगरा से इलाहाबाद स्थानांतरित होने के बाद जब यहां कामकाज शुरू हुआ तो यहां दो तरह के अधिवक्ता नामित थे। एक हाईकोर्ट द बैरिस्टर्स ऑफ द इंग्लिश और दूसरे आयरिश बार्स एंड एडवोकेट्स ऑफ स्कॉडलैंड। इसके अलावा कई वकील और प्लीडर भी थे। तीन फरवरी 1873 को 12 यूरोपियन बैरिस्टर्स ने मिलकर बार एसोसिएशन की स्थापना की। बार के पहले अध्यक्ष जारडाइन बनाए गए।

बार एसोसिएशन में पंडित मोती लाल नेहरू, पंडित जवाहर लाल नेहरू, पंडित मदन मोहन मालवीय,पंडित सर सुंदर लाल, जोगेंद्र नाथ चौधरी, सर तेज बहादुर सप्रू, डॉ.कैलाश नाथ काटजू, पुरुषोत्तम दास टंडन जैसे लोग भी रह चुके है सदस्य

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधाकांत ओझा के मुताबिक स्थापना के बाद बार एसोसिएशन का नाम बदलकर बार लाइब्रेरी हो गया। तब सदस्यों ने मुख्य न्यायमूर्ति से इसका पदेन अध्यक्ष बनने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार करते हुए उन्होंने पदेन अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। उस समय बार लाइब्रेरी एक अलग इकाई थी। इसके दो वर्षों के बाद 1875 में यहां प्रैक्टिस कर रहे वकीलों ने एक अलग संगठन बनाकर अयोध्या नाथ को अध्यक्ष नियुक्त किया और यह वकील एसोसिएशन कहलाया।

उस समय एसोसिएशन में पंडित सर सुंदर लाल, जोगेंद्र नाथ चौधरी, पंडित मोती लाल नेहरू, पंडित जवाहर लाल नेहरू, पंडित मदन मोहन मालवीय, सर तेज बहादुर सप्रू, डॉ.कैलाश नाथ काटजू, पुरुषोत्तम दास टंडन, डॉ.सतीश चंद्र बनर्जी, प्यारे लाल बनर्जी, पंडित श्याम कृष्ण धर, डॉ.नारायण प्रसाद अस्थाना, पंडित गोपाल स्वरूप पाठक, पंडित कन्हैया लाल मिश्र आदि सदस्य थे। यह संगठन 1928 तक कार्य करता रहा।

1933 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की ओर से मान्यता प्रदान की गई‚ तब से इसे हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नाम से जाना जाने लगा

वर्ष 1926 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया का अधिनियम पारित होने के बाद 1928 में वकील एसोसिएशन का नाम बदलकर एडवोकेट एसोसिएशन कर दिया गया ।
बार लाइब्रेरी और एडवोकेट एसोसिएशन के अलावा एक और संगठन था, जिसका नाम इंडियन बैरिस्टर था। इसमें वह लोग होते थे, जिनका सदस्यता प्रार्थनापत्र बार लाइब्रेरी की ओर से निरस्त कर दिया जाता था ।

जब निहाल चंद का सदस्यता प्रार्थनापत्र बार लाइब्रेरी की ओर से निरस्त कर दिया गया, तब उन्होंने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर एक संगठन बनाया। इसको 1933 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की ओर से मान्यता प्रदान की गई। तब से इसे हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नाम से जाना जाने लगा । इसमें एडवोकेट्स ओर बैरिस्टर्स दोनों शामिल थे । जब 1947 में बी.मालिक मुख्य न्यायाधीश बने तो उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए एक बिल्डिंग निर्माण की मंजूरी दी, जिसमे वर्तमान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन स्थित है ।

अधिवक्ता संंघों को मिलकर बना इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन

अधिवक्ताओं के लिए बिल्डिंग का निर्माण मुख्य न्यायाधीश ओएच.मुथ्यु के कार्यकाल में पूरा हुआ। इस दौरान उन्होंने एक सुझाव दिया क्यों न हाईकोर्ट के सभी अधिवक्ताओं का एक सम्मिलित संगठन बनाया जाए। 19 सितंबर 1957 को तत्कालीन महाधिवक्ता के.एल.मिश्रा ने तीनों संगठन बार लाइब्रेरी, एडवोकेट एसोसिएशन तथा बार एसोसिएशन को पत्र लिख कर मुख्य न्यायधीश के सुझाव के बारे सूचित किया कि तीनों संगठनों को सम्मिलित कर एक संगठन बनाया जाए।

इसी परिप्रेक्ष्य में तीनों संगठनों ने 18 और 28 नवंबर 1957 को संयुक्त सभा में प्रस्ताव पारित किया। इन तीनों संगठनों को संयुक्त कर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन नाम दिया गया। तबसे यही नाम प्रचलित है। अध्यक्ष राधाकांत ओझा कहते हैं, यह संगठन आज विशाल रूप ले चुका है। फिलहाल इसके 31 हजार सदस्य बन चुके हैं।

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