IPC की धारा 96 से 106 के बीच आत्मरक्षा का अधिकार सभी को दिया गया है। यह कानून जेंडर न्यूट्रल है, यानी इसमें पति और पत्नी का कोई लेना देना नहीं है। एक पति अपनी सुरक्षा में पत्नी के साथ धक्का-मुक्की करता है तो उस पर कानूनी रूप से कोई मामला नहीं बनेगा।

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खबरी पोस्ट नेशनल न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली। राष्ट्रीय महिला आयोग की तरह राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग उठ रही है। मांग करने वाले वकील का नाम है महेश कुमार तिवारी। जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला दिया है।

जिसमें दावा किया गया है कि 2021 में देश भर में 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें से आत्महत्या करने वाले विवाहित पुरुषों की संख्या 81,063 थी, जबकि 28,680 शादीशुदा महिलाएं थीं।

साल 2021 में लगभग 33.2% पुरुषों ने पारिवारिक समस्याओं की वजह से और 4.8% पुरुषों ने शादी से जुड़ी परेशानियों की वजह से अपनी जान गंवा दी।

डेवलेप कन्ट्रीज UK, US, कनाडा में घरेलू हिंसा का कानून जेंडर न्यूट्रल ; जबकि इंडिया में स्पेसिफिक

डेवलेप कन्ट्रीज जैसे यूके, यूएस, कनाडा में घरेलू हिंसा का कानून जेंडर न्यूट्रल है। जबकि इंडिया में ये स्पेसिफिक है। यानी सिर्फ महिलाओं के लिए है।नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन के पास भी कोई स्पेसिफिक लॉ नहीं है जो इस इश्यू को डील कर सके।वही सुप्रीम कोर्टे के एक वरिष्ठ अधिवक्ताा ने कहा कि मैं महिलाओं के खिलाफ नहीं हूं, बस चाहता हूं पुरुषों को भी समान अधिकार मिले।

पतियो के पास भी कुछ कानूनी अधिकार अपनी सुरक्षा के लिए मौजूद

पति के पास पत्नी के समान अधिकार नहीं है लेकिन कुछ कानूनी अधिकार उनके पास अपनी सुरक्षा और मान-सम्मान के लिए मौजूद हैं।

1.पति घरेलू हिंसा के मामले में पुलिस से मदद ले सकता है। अगर पति के साथ पत्नी मार-पिटाई कर रही है। उस पर गलत काम करने के लिए कोई जोर-दबाव बना रही है तब वह 100 नंबर पर या फिर महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 पर ही कॉल करके पुलिस से मदद ले सकता है।

2.खुद से बनाई गई प्रॉपर्टी यानी स्व-अर्जित प्रॉपर्टी पर सिर्फ और सिर्फ पति का ही अधिकार होता है। पत्नी या बच्चों का उस पर कोई अधिकार नहीं होता। वह जिसे चाहे उसे दे सकता है या किसी को भी न देकर ट्रस्ट को हैंडओवर कर सकता है।

3.पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाली पत्नी के खिलाफ पुलिस और कोर्ट दोनों की मदद ले सकता है। जैसे-

  • उसके परिवार से न मिलने देना
  • दोस्तों-रिश्तेदारों से न मिलने देना
  • बार-बार नामर्द बोलना
  • घर से बाहर निकाल देना
  • हर काम में हद से ज्यादा टोका-टाकी
  • शारीरिक हिंसा, दर्द देना या नुकसान पहुंचाना
  • सबके सामने या फिर अकेले में भी अपशब्द बोलना या गाली देना
  • बार-बार आत्महत्या की धमकी देना
  • भावनात्मक हिंसा करना

4. पत्नियों की तरह ही पति को भी यह अधिकार है कि वे तलाक के लिए याचिका दायर कर सकता है। इस अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पति को अपनी पत्नी की सहमति की कोई जरूरत नहीं होती। वो अपने ऊपर अत्याचार, जान का डर या मेंटल स्टेबिलिटी का जिक्र देते हुए याचिका दायर कर सकता है।

5.पत्नी की तरह ही पति को भी हिंदू मैरिज एक्ट में मेंटेनेंस यानी भरणपोषण और रखरखाव का अधिकार दिया गया है। मामले में होने वाली सुनवाई के बाद उसे मिलने वाली मेंटेनेंस की रकम को कोर्ट डिसाइड करती है।

6.पति का भी बच्चे की कस्टडी पर बराबरी का अधिकार माना जाता है।

तलाक या आपसी सहमति के बिना तलाक के केस में पति को है ये अधिकार

एकतरफा तलाक या आपसी सहमति के बिना तलाक के केस में पति को ये अधिकार मिलता है। बच्चे के भविष्य को देखते हुए कोर्ट आर्थिक रूप से सक्षम अभिभावक को ही बच्चे की कस्टडी अधिकतर मामलों में सौंपती है।

अगर बच्चा बहुत छोटा है तब कोर्ट उसकी देखभाल का जिम्मा मां को सौंपता है। अगर मां किसी कारण से सक्षम नहीं है तो कोर्ट अपने फैसले में बदलाव कर सकता है।

एक्सपर्टो से जब जानकारी चाही गई तो उन्हाेने इस प्रकार बताया

  • पत्नी के पास घरेलू हिंसा का कानून है, पति के लिए वैसा कोई कानून आजतक बना ही नही है।
  • घरेलू हिंसा से सुरक्षा का कानून सिर्फ पत्नी के लिए है, पति के लिए नहीं।
  • पत्नी अगर पति को घर परिवार से दूर रहने पर मजबूर करे तो क्या अधिकार हैं उसके पास
    इसे मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में लिया जाएगा। जिसके आधार पर पति अपनी पत्नी से तलाक की अर्जी कोर्ट में लगा सकता है, सेक्शन 498a के तहत।
  • पत्नी का किसी और के साथ अफेयर हो, फिजिकल रिलेशनशिप हो, तो पति क्या कर सकता है?
     इस कंडीशन में एडल्ट्री का ग्राउंड लेते हुए पति अपनी पत्नी से तलाक मांग सकता है जिसकी याचिका फैमिली कोर्ट में लगानी होगी।
  • पत्नी पति का घर छोड़कर मायके या कहीं और रह रही हो, तो पति उसके खिलाफ क्या एक्शन ले सकता है?
    अगर पत्नी बिना वजह घर छोड़कर चली जाती है और वापस नहीं आती है तो पति हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 9 के तहत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एप्लिकेशन दे सकता है। वो मांग कर सकता है कि कोर्ट पत्नी को वापस घर लौटने का आदेश दे।
  • हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 9 के तहत ये प्रोविजन भी है कि ऐसे मामले में घर छोड़कर जाने वाले को कोर्ट में ये साबित करना होता है कि आखिर उसने घर क्यों छोड़ा।
  • पति ऐसे केस में CrPC की धारा 154 के तहत पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करा सकता है।
  • अगर पत्नी अपने पति की पिटाई करे, खुद के बचाव के लिए क्या पुरुष उस पर हमला कर सकता है?
  •  IPC की धारा 96 से 106 के बीच आत्मरक्षा का अधिकार सभी को दिया गया है। यह कानून जेंडर न्यूट्रल है, यानी इसमें पति और पत्नी का कोई लेना देना नहीं है।
  • एक पति अपनी सुरक्षा में पत्नी के साथ धक्का-मुक्की करता है तो उस पर कानूनी रूप से कोई मामला नहीं बनेगा।
  • यहां तक कि अगर पत्नी के हाथ में कोई धारदार हथियार है जिससे पति को गंभीर चोट लगी है या लग सकती है तो वह अपने बचाव में पत्नी पर हमला भी कर सकता है।
  • पत्नी अक्सर गाली देती है, मायके वाले पति को धमकाते हैं क्या इस बात की शिकायत पुलिस से की जा सकती है?
  • पति हो या पत्नी एक-दूसरे को गंदी गालियां देना भारतीय दंड संहिता की धारा 294 में एक दंडनीय अपराध है।
  • IPC की धारा 120B के तहत पति अपनी पत्नी पर अपने और अपने परिवार के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का केस भी दर्ज करवा सकता है।
  • दहेज के केस में अगर पति फंस जाए, तो खुद को कैसे बचाए?
  •  अगर पत्नी दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए पति पर IPC की धारा 498A के तहत झूठा केस करती है, तो पति CrPC की धारा 227 के तहत अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है।
  • इसके बाद पति ये भी मांग कर सकता है कि उसकी पत्नी दहेज प्रताड़ना के सभी पुख्ता सबूत पेश करे।
  • पत्नी ने अगर पति को घरेलू हिंसा के झूठे केस में फंसाया, तो पति क्या कर सकता है?
  • IPC की धारा 191 के तहत पति अपनी पत्नी पर केस कर सकता है। अगर पति को लगता है कि उसकी पत्नी या फिर कोई भी उसके खिलाफ कोर्ट में या पुलिस को झूठे सबूत पेश कर रहा है, तो वो ये दावा करते हुए केस दर्ज करवा सकता है कि उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए जो सबूत दिए जा रहे हैं वो झूठे हैं।
  • पति के घर को अगर पत्नी नुकसान पहुंचाती है तो पति क्या करे?
  • अगर पत्नी पति के घर को नुकसान पहुंचाती है और पुलिस के पास जाकर पति के खिलाफ मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ना करने का आरोप लगाती है, तो सिविल प्रोसिजर कोड की धारा 9 के तहत पति पत्नी के खिलाफ केस दर्ज करा सकता है और उससे नुकसान की भरपाई मांग सकता है।
  • मेंटेनेंस की अर्जी कोर्ट में कब लगाई जा सकती है?
  • अगर पति और पत्नी के रिश्ते खराब हो गए हैं और दोनों एक-दूसरे के साथ कानूनी तौर पर नहीं रहते हैं तो पति या पत्नी, दोनों में से कोई भी मेंटेनेंस की अर्जी कोर्ट में लगा सकता है।
  • कोई पुरुष अगर बेरोजगार है तो क्या वो अपनी कमाऊ पत्नी से भरणपोषण का खर्चा मांग सकता है?
  • हां बिल्कुल। हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के अनुसार, पति और पत्नी दोनों एक-दूसरे से मेंटेनेंस की डिमांड कर सकते हैं।
  • अगर पति शारीरिक या मानसिक तौर से कमजोर है जो पैसे कमाने के लायक नहीं है भरण-पोषण का खर्चा मांग सकता है।
  • अगर पत्नी भी कामकाजी नहीं है तब भी अपने भरण-पोषण के लिए उसे पैसे कमाने के लिए मजबूर कर सकता है?
  • नहीं। ऐसा करने का अधिकार उसके पास नहीं है।
  • पत्नी का इंट्रेस्ट सेक्शुअल लाइफ में नहीं है, ऐसे में तलाक लिया जा सकता है कि नहीं?
  • हां, अगर पति से फिजिकल रिलेशन पत्नी नहीं बना रही है या उसे मना करती है तो यह तलाक का आधार बनता है। 
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भरण पोषण की मांग पत्नी से पति सिर्फ इन्हीं कंडीशन में कर सकता है

  • पति ने अगर पत्नी से मेंटेनेंस लेने का दावा किया है, तो पति को कोर्ट में साबित करना होगा कि वो शारीरिक या मानसिक तौर पर कमाने के लायक नहीं है और उसकी पत्नी पैसे कमाती है।
  • धारा 24 के मुताबिक अगर कोर्ट में पति-पत्नी का कोई केस चल रहा है और कार्यवाही के दौरान कोर्ट को ये पता लग जाए कि पति खुद की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहा है। यहां तक की उसके पास इस कोर्ट की कार्यवाही के लिए भी पैसे नहीं है तो कोर्ट पत्नी को आदेश दे सकता है कि वो अपने पति को मेंटेनेंस और कोर्ट केस में आने वाले खर्च के लिए पैसे दे। हालांकि, इसमें पत्नी के पास सोर्स ऑफ इनकम होना जरूरी है।
  • अगर पति के पास प्रॉपर्टी और कमाने की क्षमता है तो वो पत्नी से मेंटेनेंस का दावा नहीं कर सकता है।
  • पति को पर्मानेंट मेंटेनेंस और भरण-पोषण मिलने का नियम थोड़ा अलग है। इस कंडीशन में कोर्ट पति और पत्नी दोनों की प्रॉपर्टी को ध्यान में रखकर विचार करता है। मान लीजिए कोर्ट ने पत्नी को आदेश दिया कि वो अपने पति को ही महीने में भरण-पोषण का खर्चा दे। पत्नी देने भी लगती है। ऐसे में अगर पति कमाने लायक हो जाता है और काम करने लगता है तो पत्नी के दावे पर कोर्ट अपने फैसले को रद्द या बदल सकती है।
  • पति-पत्नी के मेंटेनेंस की लड़ाई के बीच क्या कोर्ट बच्चों पर होने वाले खर्च को भी देखकर फैसला करती है?
  •  हिंदू मैरिज एक्ट की धारा-25 के तहत तलाक के वक्त एक साथ या फिर महीने के हिसाब से मेंटेनेंस तय किया जाता है। मान लीजिए अगर पति का वेतन 20 हजार है और पत्नी का 50 हजार। ऐसे में पूरे परिवार की इनकम 70 हजार मानी जाएगी।
  • दोनों पार्टनर का अधिकार 35-35 हजार पर होगा। कोर्ट इस तरह से इनकम को ध्यान में रखकर फैसला सुनाता है। साथ ही ये भी देखता है कि बच्चे किसके साथ रहते हैं। उनके कितने खर्च हैं। उस आधार पर भी खर्चा तय होता है। पति के पास नौकरी न होने की स्थिति पर बच्चों की देखरेख का खर्च भी पत्नी के पास होता है अगर वह नौकरीपेशा है तब।
  • अगर पत्नी अपने पति पर मैरिटल रेप का इल्जाम लगाएं, तो क्या ये केस बनता है?
  • इंडिया में मैरिटल रेप अपराध नहीं है। अगर कोई पति अपनी पत्नी से उसकी सहमति के बिना फिजिकल रिलेशन बनाता है तो इसे मैरिटल रेप कहा जाता है, लेकिन संविधान में इसके लिए सजा का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए पत्नी इस पर कोई केस नहीं कर सकती है।
  • धारा 375 में एक अपवाद है जिस वजह से मैरिटल रेप को अपराध नहीं माना जाता। धारा 375 का एक प्रावधान कहता है कि अगर किसी महिला की उम्र 18 साल से ज्यादा है और उसका पति उसकी सहमति के बिना शारीरिक संबंध बनाता है तो इसे रेप नहीं माना जाएगा।
  • पति अपनी पत्नी से तलाक कैसे मांग सकता है उसके लिए क्या कंडीशन होनी चाहिए?
  • अगर पत्नी किसी भी तरह से पति को प्रताड़ित कर रही है तो ऐसे मामले में पति हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13 के तहत तलाक मांग सकता है।
  • इसमें अर्जी करने वाले के साथ अगर सामने वाला पक्ष क्रूरता, शारीरिक या मानसिक हिंसा कर रहा है तो वो तलाक ले सकता है।
  • पत्नी की प्रॉपर्टी पर पति का कितना हक होता है?
  • पत्नी के मरने के बाद पति का उसकी प्रॉपर्टी पर अधिकार होता है। हिंदू, मुस्लिम दोनों धर्मों में ये नियम फॉलो होता है।